दिव्य विचार: सोच को सार्थक दिशा प्रदान करता है अनुभव- मुनिश्री चन्द्रप्रभ जी महाराज
मुनिश्री चन्द्रप्रभ महाराज जी कहते हैं कि बार-बार के दोहराव से आपकी नासमझी और जीवन के प्रति अजागरूकता नजर आने लगती है। अनुभव आदमी की सोच और विचारधाराओं पर प्रभाव डालता है। हम अनुभवी का सम्मान करते हैं। बाल सफेद हो जाना ही परिपक्वता की निशानी नहीं है। व्यक्ति की सोच, उसकी विचारधारा उसकी शिक्षा और अनुभवों से प्रभावित होती है। हम सही सोच, सही सोहबत और सही अनुभवों का उपयोग करते हुए अपनी सोच को सार्थक दिशा प्रदान कर सकते हैं। मनुष्य जैसा सोचेगा, वैसा ही उसके जीवन में घटित होगा। विचार के अनुसार ही व्यक्तित्व निर्मित होगा। विचार व्यक्तित्व की नींव है और व्यक्तित्व विचारों का ही विस्तार है। कोई भी चीज पहले बीज के रूप में आरोपित होती है, फिर वही बीज बढ़ते-बढ़ते बबूल या कैक्टस का रूप धारण कर लेती है। आदमी जैसा सोचता है, वैसा ही मुँह से अभिव्यक्त होता है, जैसा अभिव्यक्त होता है वैसी ही उसकी गतिविधियाँ होती हैं जैसी गतिविधियाँ होती हैं, वैसा ही चरित्र बनता है, जैसा चरित्र होता है, वैसी ही आदतें बना करती हैं। अगर आदतों और चरित्र को सुधारना है तो व्यक्ति अपनी सोच और विचारधारा को सुधार डाले। हम बाहर दीप सजाएँ यह अच्छी बात है, पर रास्ते में दीप सजे हों और घर के भीतर अंधेरा हो तो बाहर के दीप हास्यास्पद ही हैं। एकमात्र सोच को सुधार कर ही वाणी, व्यवहार, आदत और चरित्र इत्यादि को सुधारा जा सकता है। इसलिए कि जो आज सोच है, जो आज विचार है, वही हमारे स्वप्न बनेंगे। उन्हीं से लक्ष्य बनता है और उन्हीं से पुरुषार्थ प्रेरित और प्रभावित होता है। बुरी सोच और बलिष्ठ शरीर- जरा बताईये कि उसका क्या परिणाम होगा? या तो किसी के दांत टूटेंगे या किसी की हड्डी - पसलियां गोल होगी। अच्छी सोच, कमजोर शरीर तक भी असंतुलन ही कहलाएगा। जीवन के लिए सदाबहार मंत्र है, अच्छी सोच, अच्छा शरीर, स्वस्थ सोच, स्वस्थ शरीर, सादा जीवन उच्च विचार, सफल जीवन का पहला आध्यात्मिक मंत्र है।






