दिव्य विचार: भीतर की बुराईयों को बाहर निकालें - मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज
मुनिश्री प्रमाण सागर जी कहते हैं कि जो बातें हमारे सबकॉन्शस माइण्ड में दबी रहेंगी, वे जब तक दबी रहेंगी, बाहर नहीं निकलेंगी, हमारे अन्दर इस तरह का अन्तर्द्वन्द्व बना रहेगा। जो चीजें आप नहीं चाहोगे, वे भी आपके पास आएँगी। उन विचारों को व्यक्त करिए, व्यक्त करिए यानी उसको आप किसी से शेयर कर दीजिए। जो बातें आपके अन्दर दमित हैं, चल रही हैं, योग्य व्यक्ति के पास जाकर शेयर कर दीजिए, कहीं नहीं तो प्रभु के दरबार में जाकर अपने हृदय के उद्गार प्रकट कर दीजिए। उन बातों को, सबकॉन्शस माइण्ड की बात को कॉन्शस में आ जाने दीजिए। धीरे-धीरे, धीरे-धीरे वह अन्तर्द्वन्द शान्त हो जाएगा, आपके चित्त पर फिर वे बातें हावी नहीं होगीं । तीसरी बात अपने अन्दर का कचरा निकालिए। यानी अपने भीतर जो भी इस प्रकार की विकृतियाँ हैं, बुराईयाँ हैं, उन्हें बाहर निकालिए। मैं इनको छोड़ता हूँ, मैं इनको छोड़ता हूँ, मैं इनको छोड़ता हूँ। मनोविज्ञान के पंडित यह बातें आज बताते हैं लेकिन हम लोगों की साधना में यह बहुत प्राचीन काल से है। हम जो प्रतिक्रमण करते हैं तो हम लोगों के लिए कहा जाता है-अच्छाई को मैं ग्रहण करता हूँ और बुराई को मैं छोड़ता हूँ। कुत्सित आचरण को छोड़ता हूँ सच्चरित्र को ग्रहण करता हूँ। यह एक साधना है। जो विचार तुम पर हावी हो रहे हैं, मैं उन्हें छोड़ता हूँ, छोड़ता हूँ, छोड़ता हूँ और जो मुझे स्वीकार करना है उसे मैं ग्रहण करता हूँ, ग्रहण करता हूँ, ग्रहण करता हूँ, ऐसा अभ्यास करो। लेकिन उल्टा हो जाता है, जो छोड़ने योग्य हैं, उनको हम ग्रहण करते हैं और ग्रहण करने योग्य चीजों को छोड़ते हैं। आप अभ्यास कीजिए फालतू की बातों में आपका दिमाग उलझना बन्द होगा। नम्बर चार महत्त्वपूर्ण है- दिमाग में कचरा डालना बन्द कर दीजिए। सफाई भी करो और कचरा भी डालो तो क्या होगा? आप व्यर्थ की बातों को अपने दिमाग में बहुत भर लेते हैं। एकदम कचरा आपके दिमाग में भर जाता है। न जाने क्या-क्या आपके दिमाग में आता है।






