दिव्य विचार: दूसरो की गल्तियों का सुधार करना कठिन- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज
मुनिश्री प्रमाण सागर जी कहते हैं कि किसी के भीतर यदि मक्कारी भरी है तो सब मक्कार ही दिखेंगे। गलत आदमी को सब कुछ गलत दिखता है। भला देखने की कला आनी चाहिए, तब जीवन का उद्धार होगा। बुरे को तो हम जन्म जन्मातरों से देखते आ रहे हैं। एक बात और बताईये कि दूसरों की तुम बुराई देखोगे तो क्या मिलेगा? दूसरों के घर में झाडू लगाने से क्या तुम्हारे घर का कचरा साफ हो जायेगा? झाडू लगाना है तो अपने घर में लगाओ। फिर देख लो कि दूसरों के ऊपर तो तुम दोषारोपण कर रहे हो, खुद के गिरेवान में झाँककर देखो कि तुम कितने पानी में हो ? ध्यान रखना, सुधार वही कर सकता है जो खुद सुधरा हुआ है। जो खुद बिगड़ा हुआ है, वह दूसरों को सुधार नहीं सकता है। सफाई करना है तो साफ-सुथरी झाडू से सफाई करो, तो ही सफाई होगी। कीचड़ और गंदगी लगी झाडू से झाडू लगाओगे तो गंदगी ही फैलेगी। तुम्हारे अन्तस् में मलिनता है और तुम चाहो कि हम दूसरों को सुधार दें तो यह कभी संभव नहीं हो पायेगा। इसलिये संत कहते हैं -अपनी दृष्टि को स्वच्छ करने की कोशिश कीजिये ।
नज़रें तेरी बदलीं तो नज़ारे बदल गये । किश्ती ने बदला रूख तो किनारे बदल गये ॥
सही दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कीजिये। हम कभी किसी के दोष को देखें नहीं और यदि कभी किसी के दोष दिख भी जायें तो उसे प्रचारित न करें। क्या करें, अच्छाई देखने की बात तो करते हैं, पर अच्छाई दिखती नहीं । बुराई बहुत जल्दी दिख जाती है। दोषारोपण करना तो बहुत सरल है पर दूसरों की गल्तियों का सुधार करना बहुत कठिन है। बन्धुओं, हम अच्छाई कम देख पाते हैं और बुराईयों पर हमारी दृष्टि ज्यादा केन्द्रित रहती हैं। इसलिए इस दृष्टि से अपने आपको बचायें।






