दिव्य विचार: जीवन में अच्छी आदतें डालो- मुनिश्री चन्द्रप्रभ जी महाराज
मुनिश्री चन्द्रप्रभ महाराज जी कहते हैं कि जो आदमी जीते जी न सुधर पाया, क्या वह मर कर सुधर पाएगा? जो जीते जी स्वयं को सुधारने के लिए संकल्पशील न हुआ, वह मरकर कभी खुद को सुधारने का संकल्प ले सके, यह मुमकिन नहीं है। आदमी के स्वभाव पर, उसकी प्रकृति तथा उसकी नेचर पर जो चीजें सबसे ज्यादा असर करती हैं, उनमें संगति, घर-परिवार, फिल्में, टी.वी., किताबें प्रमुख हैं। ध्यान रखिए, जीवन तो खेती की तरह है। यदि गलत बोयेंगे तो गलत ही पायेंगे। अच्छा बोयेंगे, अच्छा पायेंगे। स्वभाव और आदत यकायक घर नहीं करते। धीरे-धीरे इनकी जड़ें मजबूत होती हैं। हाथी कितना शक्तिशाली होता है, कितना विशाल होता है। क्या आदमी के लिए संभव है कि वह उसे वश में कर सके ? सैकड़ों घरों और आदमियों को कुचलने के लिए एक अकेला हाथी काफी होता है, पर वही हाथी छोटे-से अंकुश से, जंजीर से नियंत्रित हो जाता है। सिगरेट, शराब, जुआ या क्रोध, मान, माया, प्रपंच ये सब भी हमें वैसे ही वश में कर लेते हैं। वश में भी ऐसे कि हम उनके आगे अपनी नाक रगड़ते और अपनी सूंड नमाते नजर आते हैं। अच्छी आदत डालो भाई, अच्छे संस्कार, अच्छा व्यक्तित्व बनाओ भाई ! आदमी के स्वभाव पर जिस पहले तत्त्व का प्रभाव पड़ता है वह व्यक्ति की अपनी मित्र मण्डली होती है। व्यक्ति को जैसे मित्र मिलते हैं, व्यक्ति का स्वभाव भी वैसा ही प्रभावित होता है। जैसे हम अपनी बेटी के लिए वर की तलाश और बेटे के लिए कन्या की तलाश बड़ी सजगता से करते हैं, उतनी ही सजगता से हम अपने जीवन में किसी मित्र का भी चयन करें। मित्र व्यक्ति के जीवन को अवश्यमेव प्रभावित करता है। अगर हमारी मित्र-मण्डली गलत है तो हमारा स्वभाव और हमारी प्रवृत्तियाँ गलत हो जायेंगी। हमारी मित्र-मण्डली अगर अच्छी है तो मान कर चलें कि हमारा स्वभाव और हमारी प्रवृतियाँ भी अच्छी होंगी। कोई मुझसे पूछे कि कौन व्यक्ति कैसा है तथा उसे मापने का थर्मामीटर क्या है, तो मैं यही कहूँगा कि किसी भी व्यक्ति को जाँचना और परखना हो तो हम केवल उसकी मित्र मण्डली को देख लें।






