दिव्य विचार: सफलता के लिए पूरे मन से प्रयास करें- मुनिश्री चन्द्रप्रभ जी महाराज
मुनिश्री चन्द्रप्रभ महाराज जी कहते हैं कि सफलता के लिए प्रयास न करना ही विफलता है। तुम पहले प्रयास करो। जब सफलता न मिले तो सोचो। जब तुम दुर्बल मन लेकर किसी काम के लिए प्रयास करते हो तो मैं कहूँगा कि तुमने पहला कदम ही गलत रख दिया। दुर्बल शरीर के लोग तो अपने जीवन में सफल हो जाया करते हैं किन्तु दुर्बल मन के लोग कभी कामयाब नहीं हुआ करते। दो पहलवान जो समान ताकत रखते हैं, फिर भी मल्लयुद्ध में जीतता तो एक ही है। जो जीतता है, वह अपनी शक्ति के बल के साथ अपने आंतरिक आत्मविश्वास और मजबूत मन से जीतता है। 'मन के हारे हार है, मन के जीते जीत'। अगर तुम जीत के लिए प्रतिबद्ध हो तो जीत अवश्य मिलेगी और यदि पहले ही यह सोच लो कि मैं हार भी सकता हूँ तो मान लो कि हार ही गये। तुमने अपनी किस्मत 'हार सकता हूँ' इस वाक्य को सौंप दी कि हारोगे ही। रेस में सौ घोड़े दौड़ते हैं लेकिन जीतता वही है जिसमें जीत का जज्बा होता है। तुम जितना कठिन श्रम करके सफलता प्राप्त करते हो, वह उतनी ही मूल्यवान होती है। देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री गरीब घर में पैदा हुए थे। अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन एक गरीब घर में पैदा हुए थे। राष्ट्रपति के. आर. नारायणन् भी अनुसूचित जाति के गरीब परिवार से आए थे। पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन अब्दुल कलाम भी अपनी भीषण गरीबी के दौर से निकलकर आए। वे इमली के बीजों को बेचकर अपनी पढ़ाई करते थे। गरीब घर में पैदा होना अभिशाप नहीं है, लेकिन अपने मन को गरीब मान लेना ही अभिशाप हैं। विकलांग होना भी सफलता में आड़े नहीं आता। धरती पर ऐसे लोग भी हुए है जिन्होनें विकलांगता को भी चुनौती दे डाली थी। प्रकृति-प्रदत्त अभावों को चुनौती देकर वे प्रकृति पर भी विजय पाने में सफल रहें। शरीर भले ही विकलांग हो जाये, पर मन को विकलांग मत बनने दीजिए। हाथ-पांव टूट जायें, चिंता न करें पर मन और मानसिकता नहीं टूटनी चाहिए।






