दिव्य विचार: कल की चिंता क्यों, आज का आनंद लो- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज

दिव्य विचार: कल की चिंता क्यों, आज का आनंद लो- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज

मुनिश्री प्रमाण सागर जी कहते हैं कि ये वे लोग हैं, जो आने वाले कल की चिन्ता में आज को विफल कर देते हैं। ध्यान रखना, जो कल की चिन्ता में अपने आज को विफल कर देते हैं, उनका कल कभी सफल नहीं हो सकता है। वे अपने जीवन को सफल नहीं कर सकते। आने वाले कल का बीज आज में है। हम आज जो करेंगे उसका परिणाम कल होगा उसकी क्या चिन्ता करना ? इहलोक का भय और परलोक का भय, ये भी दुर्बलतायें ही हैं। ये जितने प्रकार के नकारात्मक भाव हैं, वे मनुष्य के मन में बहुत तेजी से हावी होते हैं। सम्यग्दृष्टि जीव निगेटिविटी से रहित होता है। जो बहुत पॉजीटिव एटीट्यूट वाला होता है वह हर चीज़ को सकारात्मकता से देखता है। उसके मन में इस तरह की दुर्भावनायें आती ही नहीं हैं। जो है, जैसा है, उसे सहज भाव से स्वीकार करो और जीवन के परम रस का आनन्द लो । वस्तुतः इसी में सार है। लेकिन जो व्यक्ति नकारात्मकता से भरे रहते हैं, उनके दिल-दिमाग के अनेक प्रकार की विकृतियाँ जन्म लेती हैं। जैसे कोई भला-चंगा आदमी है. वह मुझे बीमारी न हो जाये, मैं बीमार न पड़ जाऊँ, ऐसी चिन्ता करता है। एक बार एक बहिन मेरे पास आई, बहुत डिप्रेशन में थी वह। मुझसे उनके परिवार वालों ने कहा - महाराज इसे समझाओ, यह बहुत डिप्रेशन में है। लगता है कि जीवन से हाथ न धो बैठे। मैने कहा- क्या बात है ? आप सुनकर ताज्जुब करोगे कि उस बहिन की एक सहेली को सफेद दाग हो गया था आजकल तो सफेद दाग की बीमारी बहुत तेजी से बढ़ रही है। वह बहिन भी इसीलिये डिप्रेशन में चली गयी, कि डॉ० ने कहा कि किसी को भी हो सकता है यह । अरे, इतना भय कि डिप्रेशन में चली गई। अरे भैया, दाग होना होगा तो कोई रोक लेगा क्या ? अभी हुआ नहीं, किन्तु चिन्ता शुरू हो गयी । यह बहुत खतरनाक चीज़ है। ऐसी चिन्तायें मन में बहुत तेजी से व्याप्त हो जाती हैं। अरे, होना होगा तो कोई रोक नहीं सकता और नहीं होना होगा तो कोई ला भी नहीं सकता। यह संयोग-वियोग संसार में चलता रहता है। जैसा अनुकूल-प्रतिकूल होना होगा, होगा। इसकी चिन्ता में अवसादग्रस्त होने से आपका आज आपके हाथ से जा रहा है।