दिव्य विचार: घृणा छोड़ो, आत्मीयता के सम्बन्ध बनाओ- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज

दिव्य विचार: घृणा छोड़ो, आत्मीयता के सम्बन्ध बनाओ- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज

मुनिश्री प्रमाण सागर जी कहते हैं कि आत्मीयता के सम्बन्ध बनाओ। तब तुम्हारे जीवन में कुछ उपलब्धि होगी। घृणा-वैमनस्य को फैला करके आखिर तुम क्या पाओगे ? घृणा का बीज बोने वाला व्यक्ति अपने जीवन को घृणित बना डालता है, इसलिये अपने आपको बचाने की कोशिश करो और अपने जीवन को तदनुरूप ढालने की कोशिश करो। देखो, जीवन में क्या आनन्द आता है। लेकिन कुछ लोग ऐसा करने में पिछड़ जाते हैं। आपने देखा होगा कि कुछ लोग पूरी की पूरी किताब की प्रूफ रीडिंग कर डालते हैं पर उनके पल्ले एक अक्षर भी नहीं पड़ता है, क्योंकि प्रूफ रीडिंग करने वाले किताब नहीं पढ़ते हैं, किताब की गल्तियाँ ढूंढते हैं। कहाँ-कहाँ गलती हैं। उस किताब के शब्द और शब्दों के अर्थों के प्रति उनकी दृष्टि नहीं जाती है। उनका ध्यान तो केवल गल्तियों पर केन्द्रित रहता है। पूरी किताब पढ़ लेने के बाद भी उनके पल्ले कुछ नहीं पड़ता है। उस किताब को पढ़ करके, जिसकी प्रूफ रीडर ने गल्तियाँ निकाली हैं. लाखों लोग अपना जीवन बदल डालते हैं। जबकि प्रूफ रीडर को कुछ भी नहीं मिलता। जिस किताब से प्रूफ रीडर ने कुछ नहीं पाया, उसी किताब से पाठक लोग बहुत कुछ पा लेते हैं और अपने जीवन को बदल डालते हैं। बन्धुओं तुम भी अपने अन्दर झाँककर देखो कि कहीं तुम प्रूफ रीडर तो नहीं बन गये हो। ज़िन्दगी की किताब के केवल प्रूफ रीडर मत बनिये या तो लेखक बनिये या फिर पाठक बनिये। देखिये जिन्दगी में कितना आनन्द आता है। हम क्या कर रहे हैं? केवल एक-दूसरे की गल्तियाँ और मीन मेख निकालने में लगे हुये हैं। यदि हमारी ऐसी प्रवृत्ति बनी रहेगी तो हम कभी अपने जीवन में सफलता हासिल नहीं कर सकते हैं। इसलिये इन सब बातों से अपने आपको बचाने की कोशिश कीजिये। अच्छाई को देखने की कोशिश कीजिये । प्रूफ रीडर को बहुत अच्छा भी नहीं माना जाता है। हम स्वयं के प्रूफ रीडर बनें, दूसरों के नहीं। हम अपने अन्दर झाँककर देखें कि मेरे अन्दर कितनी कमियाँ हैं, बजाय दूसरों के । यदि हम अपनी कमजोरियों पर निगाह रखेंगे तो निश्चित रूप से हमारे जीवन का उद्धार होगा ।