दिव्य विचार: बुराई के पीछे मत भागो, अच्छाईयां फैलाओ- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज

दिव्य विचार: बुराई के पीछे मत भागो, अच्छाईयां फैलाओ- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज

मुनिश्री प्रमाण सागर जी कहते हैं कि बन्धुओं, जो काम बात को दबाकर के किया जा सकता है, वह काम बात को फैलाने से सहज नहीं किया जा सकता है। अपनी दृष्टि को ऐसे ही परिवर्तित करने की हम चेष्टा करें। यदि इस रूप में हमारे भीतर परिवर्तन घटित होने लगता है तो हमारा जीवन निहाल हो जाता है और ऐसा परिवर्तन अगर हम अपने भीतर घटित करने में समर्थ नहीं होते हैं तो हम अपने जीवन में कभी भी कामयाबी हासिल नहीं कर सकते हैं। इसलिये बन्धुओ, गल्तियाँ तो सबके साथ संभव हैं, हम गल्ती को देखें नहीं और यदि कदाचित् गल्ती दिख भी जायें तो उसको फैलाने की कोशिश न करें। जहाँ तक बने उसको वहीं की वहीं दबाने की कोशिश करें। अच्छाई अनुकरणीय होती है। अच्छाईयों को फैलाना चाहिये, बुराइयों को नहीं। लेकिन हम लोग उल्टा ही करते हैं। दूसरों के अन्दर स्थित परमाणु बराबर गुणों को अपने अन्दर विकसित करके पर्वत के समान बनाने वाले सन्त तुल्य लोग इस जगत् में कितने हैं? दूसरों के परमाणु बराबर अवगुण को पर्वत के समान बनाने वाले लोग तो बहुत हैं। यह हमारी कमी है। हमें इसे बदलना चाहिये। जब तक हम अपनी सोच को नहीं बदल देते हैं तब तक हम अपने जीवन में सुधार की कोई संभावना विकसित नहीं कर सकते हैं। बन्धुओं, मोक्षमार्ग में तो हम ऐसा करें ही, घर-परिवार में भी हम ऐसा ही करने का प्रयास करें। यदि आप अपने घर में प्रेम और शान्ति का साम्राज्य स्थापित करना चाहते हो, यदि आप चाहते हो कि आपके घर-परिवार के सदस्य एक-दूसरे से हिल मिल कर रहें तो इन बातों को ध्यान में रखें। सम्यग्दर्शन की जो बात आपसे कही है वह केवल आध्यात्मिक सन्दर्भ में ही नहीं कही है, बल्कि हर क्षेत्र में अपनाने के लिये कही है। यदि हम हर-एक क्षेत्र में इन बातों को अपनाते हैं तो वह आध्यात्मिक क्षेत्र में ही नहीं, अपितु प्रत्येक क्षेत्र में हमारी सफलता का आधार बनता है इसलिये उसकी तरफ भी हमारी दृष्टि जानी चाहिये। घर-परिवार में भी आप एक-दूसरे के दोषों को देखना बन्द कर दीजिये । अच्छाइयों को देखिये ।