दिव्य विचार: हर कार्य दिल लगाकर करें- मुनिश्री चन्द्रप्रभ जी महाराज

दिव्य विचार: हर कार्य दिल लगाकर करें- मुनिश्री चन्द्रप्रभ जी महाराज

मुनिश्री चन्द्रप्रभ महाराज जी कहते हैं कि अगर कार्य बोझ लगे तो उसे छोड़ें नहीं, बल्कि अपनी मनोदशा को बदलने की कोशिश करें जिसके कारण आपको काम बोझिल लगता है। आईने बदलने से सौन्दर्य नहीं बनता। आपकी जैसी शक्ल है आईना वैसी ही शक्ल प्रतिबिम्बित करता है। हाँ, उदास और गमगीन चेहरों को फूलों जैसा खिला लेने से अवश्य ही आपके आसपास सुवास फैल जाएगी। चेहरे की खुशहाली आईने में भी नजर आएगी। मनोदशा के बदलते ही सब सुरुचिपूर्ण हो जाता है। भोजन भी करें तो आनन्दपूर्वक, पूरा रस लेकर। यदि आप भाग-दौड़ की जिंदगी में तनिक दिल लगाकर भोजन करें तो आपको भोजन की सुस्वादुता का पता चलेगा। जीवन का प्रत्येक कार्य एक मन से सम्पादित होना चाहिए। जीवन में सफलता पाने का यही मूल मंत्र है। जीवन में जिस कार्य को करो, उस समय वैसा ही मन रखो। एक काम-एक मन जीवन की सफलता का राजमंत्र है। यह आपको उन सोपानों तक पहुँचाएगा जहाँ जाने की आपकी आकांक्षा है। बोझिलता को उतार फेंकना ही आपकी समझदारी है। तकिया रात में नींद के समय बहुत सुकून देता है लेकिन दिन में तो उसे साथ लेकर नहीं चला जा सकता। रात में जिसने सुख दिया, वह दिन में बोझ बन जाता है। दिन में जिसने सुख दिया, वह रात में बोझ बन जाता है इसलिए उसे किनारे कर देना ही ठीक है। जब तक सुख मिला ठीक है। अब उसे परे हटा ही दो। बोझ को उतार देने पर ही नवीनता का अनुभव कर सकोगे। जैसे साँप केंचुली उतार देता है, ठीक उसी तरह अपने दिल के बोझों को उतार दो। मन में सतत रहने वाली चिंताएँ व्यक्ति का पहला बोझ हैं। तुम चिंता से बाहर निकलो। चिंता आदमी के जीवन को वैसे ही चाट जाती है जैसे भ्रष्टाचार किसी देश को तथा आंतकवाद पूरे विश्व को। तुम प्रकृति को व्यवस्था पर आस्था रखो। जन्म भी प्रकृति की ही व्यवस्था का एक चरण है और मृत्यु भी ! संयोग-वियोग, हानि-लाभ, सबके पीछे प्रकृति की व्यवस्था-शैली काम कर रही है।