दिव्य विचार: अच्छे इंसान बनने की कोशिश करो- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज

दिव्य विचार: अच्छे इंसान बनने की कोशिश करो- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज

मुनिश्री प्रमाण सागर जी कहते हैं कि द्वेषवश दोषारोपण। हमारे मन में दूसरों के प्रति द्वेष आ गया, फिर उसमें एक हजार अच्छाई हों, पर व्यक्ति बुरा ही लगता है और हम झूठी बुराई करते हैं। मनुष्य के मन की बड़ी दुर्बलता है, जिससे प्रेम होता है, उसकी बुराई में भी अच्छाई दिखती है और जिससे द्वेष होता है, उसकी अच्छाई में भी बुराई दिखती है। यह मिथ्या दोषारोपण महापाप है। इससे अपने आप को बचाओ, नियन्त्रण लाओ। एक अच्छे इंसान के रूप में अपने आप को प्रतिष्ठापित करना चाहते हैं, तो दोषारोपण की प्रवृति से बचें। इस दोषारोपण का एक विकृत रूप है-चुगलखोरी, नारदगिरी। बहुत चलता है आजकल। सर्वविनाश का कारण है। इसी के कारण घर बिखरता है, संघ टूटता है, समाज बिखरता है, संस्कृति का लोप होता है। हम लोग बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन अपने भीतर देखने की कोशिश नहीं करते कि आखिर खड़े कहाँ हैं? किसी पर दोष लगाना बहुत आसान है, बोल दो और निकल जाओ। आजकल तो सोशल मीडिया पर यही सब काम हो रहा है। पॉजिटिव बात को फैलाने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है और नकारात्मक बात बहुत तेजी से फैल जाती है। बात सही है-अच्छी हवा धीरे-धीरे फैलती है और धुआँ बहुत तेजी से फैलता है। आप ज्योति जलाओ तो उसकी किरणें धीरे-धीरे फैलती हैं और धुआँ बहुत तेजी से। ऐसी ही प्रवृत्ति मनुष्य की हो गई है। जब रोज भगवान् से प्रार्थना करते हो कि भगवन ! जब दोष बोलने का प्रसंग आए तो मैं मौन हो जाऊँ। यह प्रार्थना करते हो और झूठा दोष गढ़ रहे हो तो तुम झूठे बने कि नहीं? बोलो ! और किसी के आगे झूठा बनोगे तो तुम्हें इतना खतरा नहीं, पर भगवान् के आगे अगर झूठा बनोगे तो तुम्हारी खैर नहीं होगी, इसे भूलना मत। तुम सब लोग भगवान् के आगे झूठे हो। बोलो ! क्या मैं गलत बोल रहा हूँ? भगवान् से बोल रहे हो कि मुझे ऐसी शक्ति दो, कोई दोष आए तो मैं मौन हो जाऊँ, थोड़ा सा गहराई से सोचने की जरूरत है।